Sunday, October 9, 2016

जिंदगी की वसीयत

जिंदगी की वसीयत
पढ़ने से पहले ये
जरूर याद रखना
गर गम ना बांट
सके किसी का
तो उसकी खुशी
में भी अपना हिस्सा
मत मांगना.

शिल्पा रोंघे

बच्चा है दिल बच्चा ही रहने दो

बच्चा है दिल बच्चा ही रहने दो
कैरी की खटास ही भाती है मुझे
कच्चे है अक्ल के कच्चे ही
रहने दों.
पके हुए आम सा नहीं
बनना है मुझे
क्योंकि पकने के बाद
ही गलने की शुरूआत होती
है.

शिल्पा रोंघे

चित भी मेरी पट भी

चित भी मेरी पट भी मेरी की सोच रखने वाले कभी प्यार नहीं
कर सकते कारोबार जरूर कर सकते है
रिश्तों के मामलों में अक्सर खाली
हाथ लौटते है.
शिल्पा रोंघे

एक खूबसूरत झूठ

एक खूबसूरत झूठ
से
बदसूरत सच्चाई हमेशा
अच्छी होती है.
गलतफ़हमी पालने से
बेहतर दो पल का
कड़वा घूट पीना हैं.

शिल्पा रोंघे

Friday, October 7, 2016

जिंदगी की किताब बना ही लो मुझे

बस इक पन्ने में मत समेटों
मुझे.
क्यों ना अपनी जिंदगी की
किताब बना ही लो मुझे
जिसकी शुरुआत
भी मैं हूं
और अंत भी.
शिल्पा रोंघे

Monday, September 19, 2016

कविता- तेजाब

मेरा नहीं तो 
किसी का नहीं
सोच के यहीं
उस तेजाब ने
मोहब्बत के
जूनून की
काली छाप
छोड़कर
झूठे
गुरुर की
आग
ठंडी कर दी
भूल गया था
वो शायद
अपने वजूद
को ही
जो मोहब्बत
की ही निशानी था.
नफ़रत तो मौत
से भी बद्तर
निशान दिल
पर है छोड़ती
शिल्पा रोंघे

दिल की बाजी

ना खेल ज़ज्बातों से किसी के 
इतना भी 
ये शतरंज का खेल नहीं
रिश्तें हैं.
दिल की बाजी दिमाग 

से तेजी से पलटती हैं
कहीं किसी दिन
चाल चलते चलते
खुद ही मोहरा
ना बन जाओ
तुम कहीं.

शिल्पा रोंघे

मेघा

देख रहे हैं राह, बचे-खुचे कुछ जंगल। अब तो निमंत्रण स्वीकार कर। सूख रही हैं नदियाँ और ताल, फिर से बह कर कहीं दूर निकल चल। मेघा, बरस  फिर से, ...