Monday, October 31, 2016

इज़हार कर मुकर जाओ

ना जाने प्यार जैसे
ज़ज्बाती शब्द
को यूं हल्के
में कैसे ले लेते
है लोग 
जब चाहे
इज़हार कर
दो
और जब निभाने
की बारी आए तो
साफ़ मुकर जाओ
शिल्पा रोंघे

Sunday, October 9, 2016

रिश्तों में दूरी

ख़ास से सब में शुमार हो जाओं गर
आप से तुम बन जाओं गर
तब समझ लेना
कि रिश्तों में दूरी नहीं
दरार आ गई हैं

शिल्पा रोंघे

जिंदगी की वसीयत

जिंदगी की वसीयत
पढ़ने से पहले ये
जरूर याद रखना
गर गम ना बांट
सके किसी का
तो उसकी खुशी
में भी अपना हिस्सा
मत मांगना.

शिल्पा रोंघे

बच्चा है दिल बच्चा ही रहने दो

बच्चा है दिल बच्चा ही रहने दो
कैरी की खटास ही भाती है मुझे
कच्चे है अक्ल के कच्चे ही
रहने दों.
पके हुए आम सा नहीं
बनना है मुझे
क्योंकि पकने के बाद
ही गलने की शुरूआत होती
है.

शिल्पा रोंघे

चित भी मेरी पट भी

चित भी मेरी पट भी मेरी की सोच रखने वाले कभी प्यार नहीं
कर सकते कारोबार जरूर कर सकते है
रिश्तों के मामलों में अक्सर खाली
हाथ लौटते है.
शिल्पा रोंघे

एक खूबसूरत झूठ

एक खूबसूरत झूठ
से
बदसूरत सच्चाई हमेशा
अच्छी होती है.
गलतफ़हमी पालने से
बेहतर दो पल का
कड़वा घूट पीना हैं.

शिल्पा रोंघे

Friday, October 7, 2016

जिंदगी की किताब बना ही लो मुझे

बस इक पन्ने में मत समेटों
मुझे.
क्यों ना अपनी जिंदगी की
किताब बना ही लो मुझे
जिसकी शुरुआत
भी मैं हूं
और अंत भी.
शिल्पा रोंघे

मेघा

देख रहे हैं राह, बचे-खुचे कुछ जंगल। अब तो निमंत्रण स्वीकार कर। सूख रही हैं नदियाँ और ताल, फिर से बह कर कहीं दूर निकल चल। मेघा, बरस  फिर से, ...