Monday, March 6, 2017

सिर्फ किताबों का ढेर ही

सिर्फ किताबों का ढेर ही
किसी को जानकार नहीं
बनाता है.
कभी कभी जिंदगी में आने और जाने
वाले लोग भी किसी सबक
कम नहीं होते है.

शिल्पा रोंघे

कहते है लोग

कहते है लोग उंची उड़ान
भरने वालों के अक्सर
ठिकाने नहीं होते है
गर हो यकीन अपने
परों पर तो ये बात भी
मान लो कि उड़ने वाले ठिकाना
नहीं ढूंढा करते वो तो तिनका तिनका
जोड़ कर घरौंदा बनाया करते है
जमीन की उन्हे जरूरत क्या
वो तो हवा में झूलती डालियों पर भी अपनी दुनिया
बसाया करते है.

शिल्पा रोंघे
जब फिज़ा ही जहरीली हो जाए
तो मुश्किल है किसी पर भी भरोसा करना
पर यकीन मानना उस वक्त भी तुम्हें
कुछ हरे भरे पेड़ मिलेंगे जो
जहरीली हवाएं निगल लेंगे
और तुम्हें जिंदगी देने वाली
सांसों से भर देंगे.

शिल्पा रोंघे

Saturday, November 12, 2016

जो निकलते हैं चंद रुपयों की तलाश

जो निकलते हैं चंद रुपयों की तलाश 
में अक्सर उनके हाथ पूरा खजाना ही 
लग जाता है.
और कभी कभी कई लोग
प्यार की तलाश में पूरी 

दुनिया का चक्कर लगा आते
है और खाली हाथ लौट
आते हैं.

शिल्पा रोंघे

एक यतीम लड़के और यतीम लड़की की हमसफ़र

एक यतीम लड़के और 
यतीम लड़की की हमसफ़र
की तलाश ना जाने 
क्यों नहीं होती थी पूरी 
पूछा तो पता चला 

वो लड़का हमेशा
किसी लड़की में मां
तो लड़की बाप ढूंढती थी.

शिल्पा रोंघे

अच्छा हुआ कि तुमने

अच्छा हुआ कि तुमने मेरा नारियल 
सा कड़ा रूप देखा.
अच्छा हुआ जिसे मैंने नहीं फोड़ा.
अच्छा हुआ जो मेरे दिल 
का नर्म रूप तुमने नहीं देखा 

गर ऐसा होता तो यकीनन
मुझसे प्यार कर बैठते.
पत्थर सा ही रहने दो
मुझे.
फूलों सा नाजूक मुझे
नहीं बनना मुझे.
प्यार की कांटों भरी राह
पर नहीं चलना मुझे.

शिल्पा रोंघे

प्यार अंधा होता है

चलो मान लिया
कि प्यार अंधा
होता है,
पर यूूं भी अंधे ना होना कि
खुद का वजूद 
आईने में देखने से
झिझकने लगो
तुम.
शिल्पा रोंघे

मेघा

देख रहे हैं राह, बचे-खुचे कुछ जंगल। अब तो निमंत्रण स्वीकार कर। सूख रही हैं नदियाँ और ताल, फिर से बह कर कहीं दूर निकल चल। मेघा, बरस  फिर से, ...