Monday, March 19, 2018

कहानी का अंत

कहानी उसी दिन ख़त्म हो
गई जब कहा किसी ने
प्यार तो है बहुत,
लेकिन तुमसे नहीं
तुम्हारे अलफ़ाज़ों
से.
शिल्पा रोंघे

Thursday, March 8, 2018

महिला दिवस पर

नर में लगा दीजिए दो मात्राएं.
तो मैं नारी बन जाती हूं .
नर से अलग नहीं हूं मैं .
तभी तो अर्धनारीश्वर का हिस्सा कहलाती हूं.
कभी मां, तो कभी पत्नी, तो कभी
बेटी बनकर घर की शोभा बढ़ाती हूं.
सरस्वती बनकर बुद्धि देती हूं.
लक्ष्मी बनकर धन देती हूं.
काली बनकर पाप का नाश करती हूं.
~महिला दिवस पर
शिल्पा रोंघे

Thursday, March 1, 2018

होली पर

होली पर

इंद्रधनुष को मुट्ठी में कैद
कर लो.
होली का त्यौहार है.
तुम रंगों  का इस्तेमाल करो ना करो.
गुलाल से भरी शुभकामना
देने में देरी ना करो.
शिल्पा रोंघे

राधा की होली

राधा की होली

पलाश के फूलों से नारंगी,
गेंदे के फूल से पीला,
गुलाब की पंखुडियों से लाल,
गुलमोहर के पत्तों से हरा रंग,
मैंने बनाया है.
सारी प्रकृति मैंने अपनी पिचकारी
में समेट ली है.
हां छूट  जाएंगे ये रंग जरा जल्दी ही
क्योंकि प्रेम के रंगों से नहीं है गहरा
कोई रंग.

शिल्पा रोंघे

Sunday, February 11, 2018

आईना ही नहीं आंखें

आईना ही नहीं आंखें भी होती है सच का सबूत,
कभी आईने के बजाए आंखों में
झांककर देखो शायद
सबसे गहरा सच नज़र आ जाए.

शिल्पा रोंघे

Saturday, February 10, 2018

एक इंसान के दिल की बात

ये तेरा ही है करम उपरवाले,
कि कुछ कमियां तू मुझमें
भी छोड़ गया मुझे बनाते बनाते,
वरना लोग मुझमें और तुझमें 
फ़र्क  ही कहां कर पाते.

~ एक इंसान के दिल की बात
शिल्पा रोंघे

प्रेम दिवस पर

कभी जलेबी  सा मीठा.
तो कभी उसकी तरह उलझा हुआ सा.

कभी नीम सा कड़वा
तो कभी उसके अर्क से बनीं  दवा सा.

कभी गुलाब सा महकता
तो कभी उसी गुलाब  की रखवाली
करता चुभता  हुआ कांटा  सा.

किसी के लिए सांस
तो किसी के लिए
इबादत ही
होता है "प्रेम"

शिल्पा रोंघे


मेघा

देख रहे हैं राह, बचे-खुचे कुछ जंगल। अब तो निमंत्रण स्वीकार कर। सूख रही हैं नदियाँ और ताल, फिर से बह कर कहीं दूर निकल चल। मेघा, बरस  फिर से, ...