Thursday, March 22, 2018

बातों का क्या है ?

प्यार भरी बातें करना आसान है,
वादा करना आसान है,
सबसे मुश्किल काम तो है,
रिश्ता निभाना और टिकाना
कई बार वादें और बातें होते है झूठे
कई खामोशी से भी रिश्तों में
संज़ीदगी है देखी गई.
हर बार बातों और वादों का शोर
ज़रूरी नहीं.
शिल्पा रोंघे

एक पंछी की कहानी

एक पंछी की कहानी

सूखे हुए तालाबों
और घटते हुए जंगलों
से आजीज आकर
मैंने अपने पंखों का रुख़  शहर की तरफ कर
लिया.

देखा तो पानी बोतल में बंद होकर बिक रहा था.
 पेड़ों  की जगह गंगनचुंबी इमारतों  का बसेरा
था.

फिर उड़ान को मैंने अपने गांव की तरफ मोड़
दिया.
जहां सूखे पत्तों  से लदे पेड़ के नीचे
किसी ने पानी का कटोरा भरकर रखा हुआ
था.

शिल्पा रोंघे

पता, ठिकाना

पता ?
ठिकाना ?
मकान ?
शहर ?
कौन सा है तुम्हारा,
सब पूछते है आजकल
कहां बसे हुए है हम.
हमने कहा अब अपने आप में
ही रहते है हम.
इससे बेहतर जगह दुनिया में
कोई लगी ही नहीं.
सवाल भी हम और जवाब भी
हम.
शिल्पा रोंघे

ना तू बुरा है

ना तू बुरा है
ना मैं बुरी हूं,
पर लगता है
कि तेरा और मेरा
दौर ज़रा जुदा
हैं.
शिल्पा रोंघे

शर्तें और प्यार ?

कहते है लोग प्यार करते है
बहुत,
मगर एक शर्त है,
हमने भी कहा शर्तें
तो कारोबार में होती है
प्यार में नहीं.
शिल्पा रोंघे

Wednesday, March 21, 2018

एक मजदूर की कहानी

एक मजदूर की कहानी
दो वक्त की रोटी के लिए
वो दोपहर में यूं तप गया.
कि अपने ही बनाए हुए महल से
बेदखल हो गया.
खुले आसमान के नीचे कल की रोटी की फिक्र
लिए सो गया.
अगले दिन फिर कोई महल बनाने में जुट गया.
ना कोई गिला  किया ना कोई शिकवा  किया.
शिल्पा रोंघे

Tuesday, March 20, 2018

वफ़ा का ख़्वाब

वफ़ा को सुनहरा ख़्वाब समझकर
दिल में बसा लो.
बेवफाई को बुरा सपना समझकर
भुला दो इसी में भलाई है.

शिल्पा रोंघे

मेघा

देख रहे हैं राह, बचे-खुचे कुछ जंगल। अब तो निमंत्रण स्वीकार कर। सूख रही हैं नदियाँ और ताल, फिर से बह कर कहीं दूर निकल चल। मेघा, बरस  फिर से, ...