Friday, July 13, 2018

मैं ही हूं सही ऐसा नहीं

नहीं कहती,
 हूं सिर्फ मैं ही सही.
लेकिन  रखने का बात अपनी,
है अधिकार
मुझे भी.
शिल्पा रोंघे

Thursday, July 12, 2018

हां खुद में ही रहता हूं.
क्योंकि किसी की जिंदगी
में दखल देने की फ़ितरत
नहीं.
साथ ना दे सकूं तो
मुफ़्त की सलाह देता नहीं.
रखता हूं अपने काम से काम
लेकिन मतलबी हर्गिज़ नहीं.

शिल्पा रोंघे

Tuesday, July 10, 2018

कर्म करते रहो

सिर्फ कर्म के बीज धरा में बोना
इंसान काम है.
बारिश हो ना हो ये उसका मिज़ाज हैं.
तो फिर फ़सल उगे ना उगे
उसकी फ़िक्र हम क्यों करे ?

Thursday, July 5, 2018

सूरत पे गुमान

मत कर सूरत पे इतना गुमान अपनी
सूरत पे नहीं हम सीरत पर मरने वाले
हैं
शिल्पा रोंघे

Wednesday, July 4, 2018

दिल की भूल

लगा था यूूं काफ़िर दिल 
को सहारा मिल गया.
मझधार को किनारा 
समझने की भूल 
ना जाने क्यों ये दिल कर बैठा.
शिल्पा रोंघे 

ना भला ना बुरा

इतने अच्छे भी ना बनों की लोग तुम्हारी
अच्छाई का फ़ायदा उठाने लगे.

इतने बुरे भी ना बनों की लोगों
का अच्छाई से ही भरोसा उठ जाए.

शिल्पा रोंघे

Tuesday, July 3, 2018

एक प्राणी की पुकार

हरी भरी सब्जियों और अनाज से 
भरी है धरा ये सारी
फिर क्यों होता है मुझ 
पर अत्याचार.
हूं मूक लेकिन 
होता है दर्द मुझे भी अपार 
हो सके तो दिला दो 
मुझे इस पीड़ा से निजात.
है सिर्फ गुज़ारिश एक बस अपना लो शाकाहार.
सुन लों  एक प्राणी के 
दिल की आवाज.

शिल्पा रोंघे 

मेघा

देख रहे हैं राह, बचे-खुचे कुछ जंगल। अब तो निमंत्रण स्वीकार कर। सूख रही हैं नदियाँ और ताल, फिर से बह कर कहीं दूर निकल चल। मेघा, बरस  फिर से, ...