Saturday, January 27, 2024

काबिलियत

 काबिलियत बनाने की पहली सीढ़ी है किताब, मगर काबिल इंसान बनने की आख़री सीढ़ी है तुम्हारा अनूठा हुनर।


Friday, December 29, 2023

आत्ममुग्धता

खुद को श्रेष्ठ साबित करने में लगे हैं कुछ लोग,

श्रेष्ठ लोगों से ज्यादा, दुनिया को  श्रेष्ठ बनाने वालों की ज़रूरत है.

आत्ममुग्धता अब चलन बन चुकी है.

शिल्पा रोंघे

Wednesday, December 27, 2023

ना अब कोई

ना अब कोई बेरोजगारी पर लिखता है.

ना अब कोई बढ़ती आबादी या घटते संसाधन पर लिखता है.

ना अब कोई भाई -भतीजावाद

पर लिखता है ना भाषावाद पर लिखता है.

ना अब कोई

महिलाओं  की   

की  तरफ  हो रहे  ज़ुल्म पर लिखता है.

क्या बाजार में अब कलम सोने की और कागज़ रेशम का मिलता है?  


शिल्पा रोंघे

Sunday, March 7, 2021

नारी दिवस

 गुलाब की पंखुडियों सी नाज़ुक भावना रखती हूं।

कोमल मन के साथ लोहे सा सख़्त हौंसला भी रखती हूं।
इंद्रधनुषी अहसासों के रंग
से जीवन की जीवंत तस्वीर बनाती हूं।
सिर्फ चूल्हे चौके तक सीमित नहीं।
दुनियादारी की भी ख़बर रखती हूं।
अबला नहीं आज की नारी
मैं, सबल मन भी रखती हूं।
शिल्पा रोंघे
#नारी दिवस# सशक्तिकरण

Friday, March 5, 2021

इंसानियत की ऐसी मिसाल

 

लौ से लौ जलती है

बुझती नहीं।

गलती अपनी हो तो रिहाई चाहिए।

किसी और कि हो तो कैद चाहिए।

कोशिश हो ऐसी कि

बात हमेशा बराबरी की होनी चाहिए।

इंसानियत की ऐसी मिसाल हर

रोज पेश होनी चाहिए।

शिल्पा रोंघे

 

Wednesday, March 3, 2021

इंसानियत

 

जानवरों के जंगल में एक इंसान का मिलना भी खबर,

और इंसानों की बस्ती में जंगल से जानवर का आना भी खबर।

काश इंसानों की बस्ती में इंसानियत का मिलना भी इक दिन बने ख़बर।

शिल्पा रोंघे

Tuesday, March 2, 2021

कृति

किसी की लिखी कृति में जबरन खुद को बैठाने की

कोशिश ना करे, खुद भी चैन से रहिए और दूसरों को भी रहने 

दें।

शिल्पा 

मेघा

देख रहे हैं राह, बचे-खुचे कुछ जंगल। अब तो निमंत्रण स्वीकार कर। सूख रही हैं नदियाँ और ताल, फिर से बह कर कहीं दूर निकल चल। मेघा, बरस  फिर से, ...