Monday, April 20, 2020

भीड़


भीड़ जब कानून हाथों में लेने
लगे, तब समझो डर खत्म हो चुका है
किसके साथ कब क्या हो जाए
ये कोई नहीं बता सकता है।
अफवाहों का बाजार जब भी गर्म हुआ है,
तब इंसान बेवजह ही मरा है।
शिल्पा रोंघे

Friday, April 17, 2020

वक्त वक्त की बात


बदल जाती है पसंद भी वक्त के साथ।
लगती थी जो चीज़े अच्छी, वो अब भाती नहीं है, करते थे जिनको नज़रअंदाज़
अब उसकी ही कमी खलने लगी है।
शिल्पा रोंघे

मसले का हल


समस्या के बारे में सिर्फ सोचने से हल निकलता नहीं,
सच है ये बुरा वक्त भी ज्यादा दिन ठहरता नहीं।
शिल्पा रोंघे

कोरोना का असर....



काम की तलाश कर रहे छोरों और छोरियों
के रिज्यूम की सेटिंग अब इंटरनेशनल
से बदलकर लोकल हो गई होगी।

शिल्पा रोंघे

Thursday, April 16, 2020

हंसी खुशी


रिश्तों की कूटनीति....
एक लड़का: जब मैं एक लड़की के पास रिश्ता लेकर गया तो....
लड़की: मैं नहीं कोई और सही
सबके लिए कोई ना कोई बना है।
लड़का: अरे कुछ नया सुना, हर लड़की के मुंह से
यही डायलॉग सुन सुनकर बोर हो गया हूं।

शिल्पा रोंघे

मन की बात


तुम कितने ही फार्मूलें क्यों ना लगा लो।
हम लिखने वालों की भावनाओं को नापना, मापना, और तौलना ज़रा मुश्किल ही काम है।
शिल्पा रोंघे

मेघा

देख रहे हैं राह, बचे-खुचे कुछ जंगल। अब तो निमंत्रण स्वीकार कर। सूख रही हैं नदियाँ और ताल, फिर से बह कर कहीं दूर निकल चल। मेघा, बरस  फिर से, ...