Wednesday, May 15, 2019

तुम कुछ ऐसे हो जाना

मेरी सूनी आंखों का काजल बन 
जाना.
मेरे गालों की लाली बन जाना.

भूल जाऊं मैं सिंगार दान 
रखना, मेरी बेनूर सी तकदीर का 
नूर तुम बन जाना.

शिल्पा रोंघे 

Friday, May 10, 2019

रूठने दो उन्हें

बेहतर है  रूठ जाना,
और साथ छूट जाना भी.

सूर्योदय को सूर्यास्त 
सूर्यास्त को सूर्योदय
कैसे कह दें चंद लोगों 
की खुशी के लिए.

शिल्पा रोंघे

Wednesday, May 8, 2019

दिल की बात

बेगाने की तरह,
मुसाफ़िर की तरह,
अंजान की तरह,
पता पूछते है वो हमसे,
कि जैसे हम ही बनाते 
हो नक्शा दिल की मंजिल 
का.
ना जाने कहां से निकलता 
है उनकी चाहतों का रास्ता 
इसी कश्मकश में हूं, क्या 
मैं भी हूं हमराही 
भूला भटका सा उनके 
सफ़र का ?

शिल्पा रोंघे 

Monday, May 6, 2019

वो

ज़िक्र ए इश्क होते ही लब उनके 
सिल जाते है.

पूछता है सन्नाटा भी कि वो तुम्हारे 
क्या लगते है.

शिल्पा रोंघे 

Sunday, May 5, 2019

नारी मन

निष्कपट नारी मन 
कहां पुरूष अहं को 
समझता है ?
उसकी जीत के लिए 
अपनी हार का भी उत्सव 
मनाता हैं.

शिल्पा रोंघे 

Saturday, May 4, 2019

दिल का मंदिर

वक्त की धीमी आंच पर सिकी
हुई आधी पकी, आधी कच्ची याद 
है.
हां ख़्वाहिशे बस करती बरबाद है,
फिर भी ना जाने क्यों गुलों 
को खिलने से ज्यादा  दिल के 
मंदिर में फ़ना हो जाने का 
शौक है.

शिल्पा रोंघे 

Friday, May 3, 2019

सत्य या.....

सत्य ने मौन की काली कोठरी को चुन लिया.
इसलिए ही असत्य ने उजले रास्तों पर 
वर्चस्व कर लिया.

शिल्पा रोंघे 

मेघा

देख रहे हैं राह, बचे-खुचे कुछ जंगल। अब तो निमंत्रण स्वीकार कर। सूख रही हैं नदियाँ और ताल, फिर से बह कर कहीं दूर निकल चल। मेघा, बरस  फिर से, ...