Friday, June 5, 2020

रंगभेद पर...

काला और गोरा क्या है ?

गर्म और ठंडी जगह

की ये देन है।

मिलेनिन कम या ज्यादा

होना  इसका कारण है।

भेद तो उनके दिमाग का फ़ितूर है

जिन्होंने विज्ञान पढ़ा तो

लेकिन समझने में कहीं ना कहीं चूक कर गए।

कुदरत कहां किसे समझती अलग है,

ये सब इंसान की नासमझी का खेल है।

शिल्पा रोंघे


Thursday, June 4, 2020

वट पूर्णिमा

सावित्री के तप और त्याग के धागों

से लिपटे वट वृक्ष की तुम आज वंदना कर लो।

वट पूर्णिमा के दिन सदियों पुरानी कथा

के श्रवण से तुम सौभाग्य में अपने

वृद्धि कर लो।

शिल्पा रोंघे


पलायन का दर्द

पलायन नहीं तरक्की की नई इबारत लिखी जाए।

काश छोटे शहरों में भी विकास की ऐसी बयार आए,

कि महानगरों से इनकी ओर लोगों का आगमन शुरु हो जाए।

शिल्पा रोंघे


Wednesday, June 3, 2020

मूक प्राणी

मूक प्राणी की

हत्या करना

किसी भी हाल में

क्षमा के काबिल नहीं।

जंगल की कहानियां सुनकर

दिल बहला रहे बच्चें अब।

खुले घूम रहे शिकारी और

पिंजरे में बंद हो रहे जंगल के प्राणी।

शिल्पा रोंघे


चाय की फ़ितरत

एक कप चाय की फ़ितरत तो देखो

सुबह पियो तो नींद से जगा देती है।

रात में पी लो रतजगा करवा देती है।

कब क्या पीना है ये जानना भी ज़रुरी है।

शिल्पा रोंघे

Tuesday, June 2, 2020

अहसास

दिल ज़ज्बात पढ़ता है।

दिमाग तर्क गढ़ता है,

इन दो लफ़्जों में छिपा

अर्थ कितना गहरा है।

पढ़ ले हज़ार किताबें चाहे कोई

अहसासों को पढ़ते वक्त इंसान अनपढ़ ही रहता है।

 

Monday, June 1, 2020

गाजर घास

रंगभेद और जातिभेद गाजर घास की तरह

होता है कितनी भी उखाड़कर फेंकने की कोशिश

कर ले कोई, पनप ही जाता है।

शिल्पा रोंघे


मेघा

देख रहे हैं राह, बचे-खुचे कुछ जंगल। अब तो निमंत्रण स्वीकार कर। सूख रही हैं नदियाँ और ताल, फिर से बह कर कहीं दूर निकल चल। मेघा, बरस  फिर से, ...