Tuesday, February 6, 2024

रिश्ता

शिकायत कम, सुलह ज्यादा होती है। 

स्वार्थ कम, त्याग ज्यादा होता है। 

मनमुटाव कम और  

सामंजस्य

ज्यादा होता है। 

हमेशा तो नहीं, लेकिन रिश्ता वही

ज्यादातर सफल होता है जो बराबरी में होता है।

शिल्पा रोंघे

Saturday, February 3, 2024

सफलता की सीढ़ी

अब महल भी होंगे,खिड़कियाँ भी होंगी

लेकिन साफ  

साँसें

नहीं होंगी।

रंग-बिरंगे छाते भी होंगे बाजार में, 

लेकिन बारिश कम होगी।

पशु-पक्षी करेंगे इंसानी बस्ती का रुख,

ख़ौफ़ में मानव यहाँ-वहाँ दौड़ेंगे।

जब नहीं बचेंगे जंगल, तब तवे सी तपेगी धरा,

हम तो सुख-सुविधाओं में रहेंगे, लेकिन

गायब हो जाएगी अगली पीढ़ी, तो क्या

यही है  

कलियुग

में सफलता की सीढ़ी।  


Thursday, February 1, 2024

दुनिया

 दुनिया के कयासों पर नहीं, सिर्फ अपने प्रयासों पर ध्यान दो, क्योंकि सिर्फ यही तुम्हारे बस में है।

Wednesday, January 31, 2024

रिश्ता

 आजकल चांदी का नारियल सोने की सुपारी और हीरे का  पानदान  देखकर रिश्ता तय होता है  ना की खानदान देखकर।   


Saturday, January 27, 2024

काबिलियत

 काबिलियत बनाने की पहली सीढ़ी है किताब, मगर काबिल इंसान बनने की आख़री सीढ़ी है तुम्हारा अनूठा हुनर।


Friday, December 29, 2023

आत्ममुग्धता

खुद को श्रेष्ठ साबित करने में लगे हैं कुछ लोग,

श्रेष्ठ लोगों से ज्यादा, दुनिया को  श्रेष्ठ बनाने वालों की ज़रूरत है.

आत्ममुग्धता अब चलन बन चुकी है.

शिल्पा रोंघे

Wednesday, December 27, 2023

ना अब कोई

ना अब कोई बेरोजगारी पर लिखता है.

ना अब कोई बढ़ती आबादी या घटते संसाधन पर लिखता है.

ना अब कोई भाई -भतीजावाद

पर लिखता है ना भाषावाद पर लिखता है.

ना अब कोई

महिलाओं  की   

की  तरफ  हो रहे  ज़ुल्म पर लिखता है.

क्या बाजार में अब कलम सोने की और कागज़ रेशम का मिलता है?  


शिल्पा रोंघे

मेघा

देख रहे हैं राह, बचे-खुचे कुछ जंगल। अब तो निमंत्रण स्वीकार कर। सूख रही हैं नदियाँ और ताल, फिर से बह कर कहीं दूर निकल चल। मेघा, बरस  फिर से, ...