Sunday, February 11, 2018

आईना ही नहीं आंखें

आईना ही नहीं आंखें भी होती है सच का सबूत,
कभी आईने के बजाए आंखों में
झांककर देखो शायद
सबसे गहरा सच नज़र आ जाए.

शिल्पा रोंघे

Saturday, February 10, 2018

एक इंसान के दिल की बात

ये तेरा ही है करम उपरवाले,
कि कुछ कमियां तू मुझमें
भी छोड़ गया मुझे बनाते बनाते,
वरना लोग मुझमें और तुझमें 
फ़र्क  ही कहां कर पाते.

~ एक इंसान के दिल की बात
शिल्पा रोंघे

प्रेम दिवस पर

कभी जलेबी  सा मीठा.
तो कभी उसकी तरह उलझा हुआ सा.

कभी नीम सा कड़वा
तो कभी उसके अर्क से बनीं  दवा सा.

कभी गुलाब सा महकता
तो कभी उसी गुलाब  की रखवाली
करता चुभता  हुआ कांटा  सा.

किसी के लिए सांस
तो किसी के लिए
इबादत ही
होता है "प्रेम"

शिल्पा रोंघे


Monday, January 22, 2018

इश्क में फ़ासला

इश्क में कुछ तो फ़ासला रखो
बेेहयाई ही इश्क होती
तो हर रोज दिल टूटने
का शोर ना होता दुनिया में

शिल्पा  रोंघे

Sunday, January 21, 2018

वसंत पंचमी पर

वसंत पंचमी पर

सरसों सी पीली आभा है आभूषण में,
चंद्र सी चमक तुम्हारे वस्त्रों में,
श्वेत वस्त्रधारिणी
वीणावादिनी,
स्वर की देवी,
हाथों में वेद लिए,
ज्ञान की देवी,
हे मां शारदे
अंधकार को हरो
और प्रकाश को भरो
जीवन में.
हे मां सरस्वती
तुम खुद ही कभी शब्दों
की तो कभी स्वरों की प्रेरणा बनों.

शिल्पा रोंघे

आशा के फूल

सितारों को गिन लूं आसमान के ये तो मुमकिन नहीं.
चांद और तारे तोड़ लूं आसमान के ये भी मुमकिन नहीं.
हां छोटा सा आंगन है मेरे घर पर.
गमलों में आशा के फूल लगाए थे.
जो अब खिलने लगे है और महकने लगे है.
इनकी महक जीने के लिए कम थोड़े ही ना है.

शिल्पा रोंघे

Saturday, January 20, 2018

मर मिटने की जरूरत नहीं

मर मिटने की ज़रूरत नहीं प्यार में.
समुंदर और नदी से सीखो
क्या  है प्यार को पाना,
एक दूजे से मिलकर खो देते
है वो वजूद अपना,
सचमुच इसे ही कहते है
सच्चे प्यार का होना.
शिल्पा रोंघे

मेघा

देख रहे हैं राह, बचे-खुचे कुछ जंगल। अब तो निमंत्रण स्वीकार कर। सूख रही हैं नदियाँ और ताल, फिर से बह कर कहीं दूर निकल चल। मेघा, बरस  फिर से, ...