Tuesday, April 30, 2019

ख़ामोशी की ज़ुबा

ख़ामोशी की भी ज़ुबा होती है.
लफ़्ज़ों की तरह उसकी भी 
अपनी राय होती है.

शिल्पा रोंघे 

Wednesday, April 24, 2019

एकांतवास

नदी कहां रास्ता बदलती है ?

सूरज का वक्त है डूबने और 
निकलने का तयशुदा.

हवा का मिज़ाज भी कभी 
बहने तो कभी ठहरने का है.

किस किस को रंगू मैं अपने 
रंग में या खुद को दुनिया के रंग में.
या बदल लूं रास्ता 
अपना हर बार ही.

क्यों ना बन जाऊं मैं 
एकांतवास का जोगी कुछ 
वक्त के लिए.

शिल्पा रोंघे 

Monday, April 22, 2019

विश्व पुस्तक दिवस

ज्ञान,
मनोरंजन, 
नैतिक मूल्य,
संवेदना,
विचार, 
कल्पनाशीलता,
अनुसंधान, 
दूरदर्शिता,
हर पन्ने पर 
को जब भी पढ़ा
तब एक सीख
है मिली.

समुद्र की गहराई में 
छिपा हर एक शब्द सा मोती सा 
लगा.

कैसे हो सकती थी 
मानव सभ्यता प्रफुल्लित 
तुम्हारे बिना, ये सचमुच 
प्रश्न बड़ा सा ?

शिल्पा रोंघे 






Saturday, April 20, 2019

काश यूं होता

एक वक्त था,
जो पल में बदल गया.

एक दिल था,
जो टूट के बिखर गया.

एक ही सपना था 
जो अधूरा रह गया.

फिर भी ज़िंदगी से 
कोई शिकवा नहीं था.
गर मुझको तुम्हारा साथ मिल 
गया होता.

शिल्पा रोंघे 
 

Wednesday, April 17, 2019

धरोहर दिवस



सदियों से संस्कृति और परंपरा 
की अमिट पहचान है.
धरोहर ही देश की आन बान 
और शान है.
शिल्पा रोंघे 

Saturday, April 13, 2019

अच्छा होता है

अच्छा होता है तब पत्थर दिल कहलाना 
जब आपकी अच्छाई को कमज़ोरी 
समझा जाने लगे.

शिल्पा रोंघे 

Friday, April 12, 2019

रामनवमी पर

भ्रष्टाचार,गरीबी और अपराध को दो वनवास.
हे राम तुम सचमुच लाओं कलियुग 
में रामराज्य.
शिल्पा रोंघे

मेघा

देख रहे हैं राह, बचे-खुचे कुछ जंगल। अब तो निमंत्रण स्वीकार कर। सूख रही हैं नदियाँ और ताल, फिर से बह कर कहीं दूर निकल चल। मेघा, बरस  फिर से, ...