Monday, March 11, 2019

अंदाज़ निराला

पानी ने पत्थरों से शिकवा कहां 
किया ?

बहना नदी का, तो ठहरना पत्थरों 
का अंदाज़ था.

एक दूसरे से जुदां, फिर भी है
अपना वजूद दोनों संभाले 
हुए.

शिल्पा रोंघे

Thursday, March 7, 2019

नारी दिवस

माना कि तुम्हें पुत्री, पत्नी, मां, बेटी 
का किरदार धीरज के साथ 
निभाना है,
किंतु त्याग की बलिवेदी पर 
अपनी अभिलाषाओं का 
बलिदान का तुम्हें उचित 
लगता है ?

माना कि मर्यादा और लज्जा 
ही तुम्हारा सबसे सुंदर गहना है,
किंतु क्या इस डर से चुप रह जाना 
तुम्हें रास आता हैं ?

माना कि समाज की खींची गई रेखा
को नहीं चाहती तुम लांघना.
किंतु क्या तुम असीमित 
संभावनाओं के बीच चाहोगी 
खुद को सीमित करके रहना.

हे नारी तुम अपने अधिकारों के 
लिए खुद ही आवाज़ उठाओं.
क्योंकि अब राजाराममोहन राय,
ईश्वरचंद विघासागर, ज्योतिबा और 
सावित्री फुले कि दिखाई राह पर 
तुम्हें ही नारी सशक्तिकरण के 
दीप जलाना है.
शिल्पा रोंघे 

Wednesday, March 6, 2019

भावना का संतुलन

श्रेष्ठता 
और 
हीनभावना 
बहुमूल्य पुस्तक 
में लगी दीमक सा 
करे काम.

शिल्पा रोंघे 

Tuesday, March 5, 2019

कभी ना भूलों

कभी ना भूलों,
क्यों,
कैसे 
और कहां 
आना है
और जाना 
है इंसा को, 

आसमान में 
उड़ने वाले 
पंरिदे भी,
जमीं पर 
ही घौंसला 
बनाते हैं.
शिल्पा रोंघे

Sunday, March 3, 2019

महाशिवरात्री

इस महाशिवरात्री 
कुछ यूं तांडव करना
नकारात्मक शक्ति 
का तुम नाश करना.

नीलकंठ बनकर 
भक्तों के दुखों को 
हर लेना, मस्तक पर
सजे अपने चंद्रमा 
से सकारात्मक 
शक्ति का प्रसार 
करना.

शिल्पा रोंघे

Saturday, March 2, 2019

एक ही तौर तरीका ?

खुद ही लिखे अपने तौर तरीके की किताब तो होगा बेहतर.

सबकी जिंदगी एक सी 
होती नहीं, तो कैसे चलेगा 
एक ही नियम से सबका काम ?

कभी कठोर तो कभी उदार 
रहना पड़ता है पानी और 
मिट्टी से बनीं दुनिया में 
बिल्कुल बर्फ़ की तरह.

शिल्पा रोंघे 

Friday, March 1, 2019

ये तो करना ही है

ज़रूरी है अपने अंदर की ऊर्जा को बचाए रखना, क्योंकि उसे हम कहीं और से नहीं
ले सकते है.

शिल्पा रोंघे 

मेघा

देख रहे हैं राह, बचे-खुचे कुछ जंगल। अब तो निमंत्रण स्वीकार कर। सूख रही हैं नदियाँ और ताल, फिर से बह कर कहीं दूर निकल चल। मेघा, बरस  फिर से, ...