Sunday, February 24, 2019

उजाले और ख़्वाब

पानी के बुलबुले से होते है
काले आसमान से आने
वाले ख़्वाब,
उजाला होते ही फूट जाते हैं.

शिल्पा रोंघे 

No comments:

Post a Comment

मेघा

देख रहे हैं राह, बचे-खुचे कुछ जंगल। अब तो निमंत्रण स्वीकार कर। सूख रही हैं नदियाँ और ताल, फिर से बह कर कहीं दूर निकल चल। मेघा, बरस  फिर से, ...